हजार के लालच में गली में घसीटा – रिश्वत के आरोप में ट्रैफिक आरक्षक निलंबित

रीवा सिरमौर चौराहे से एक शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां आम जनता की सेवा और सुरक्षा में तैनात ट्रैफिक विभाग के एक आरक्षक पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप किसी मामूली व्यक्ति ने नहीं, बल्कि एक संघर्षरत ऑटो चालक ने लगाया है – वही ऑटो चालक जो दिनभर पसीना बहाकर अपने परिवार का पेट पालता है। मामला यह है कि ट्रैफिक आरक्षक पुष्पराज द्विवेदी, जिन्हें रीवा ट्रैफिक विभाग में आरक्षक नंबर 514 के रूप में पदस्थ किया गया था, पर यह आरोप है कि उन्होंने सिरमौर चौराहे पर एक ऑटो चालक को रोका। चालान बनाने के बहाने उसे एक सुनसान गली में ले जाया गया और वहां ₹1000 की रिश्वत की मांग की गई। ऑटो चालक ने जब यह कहकर विरोध किया कि उसके पास पैसे नहीं हैं और वह किसी भी अवैध वसूली का हिस्सा नहीं बनेगा, तब यह मामला एसपी विवेक सिंह तक जा पहुंचा। एसपी विवेक सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत कार्रवाई करते हुए पुष्पराज द्विवेदी को निलंबित कर दिया। एसपी ने न केवल यह कठोर निर्णय लिया, बल्कि पूरे ट्रैफिक अमले को एक सख्त चेतावनी भी दी है – “पैसे की भूख में जनता को मत कुचलो, वरना अगली बारी तुम्हारी होगी!” इस मामले की एक और परत तब सामने आई जब यह जानकारी मिली कि पुष्पराज द्विवेदी की भर्ती अनुकंपा नियुक्ति के तहत हुई थी। उनके पिता भी ट्रैफिक विभाग में कार्यरत थे और सेवा के दौरान ही उनका निधन हो गया था। पिता की मौत पर मिले सरकारी सहारे को बेटे ने अपनी ताकत नहीं, दुकान समझ लिया। जिस नौकरी को किसी की मौत की पीड़ा और परिवार की मजबूरी के बदले में पाया गया था, उस पद की गरिमा को यूं एक गली में गिराकर, पुष्पराज ने साबित कर दिया कि जब सिस्टम संवेदना पर नहीं, लोभ पर टिके तो फिर भ्रष्टाचार जन्म लेता है। यह घटना केवल एक आरक्षक की बर्खास्तगी नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है – आम आदमी अब चुप नहीं है, और प्रशासन अगर जागे तो कोई भी कुर्सी इतनी ऊंची नहीं कि उस पर बैठे हुए भ्रष्टाचार नजर न आए। रीवा में इस तरह की घटनाएं न केवल पुलिस की साख पर सवाल खड़ा करती हैं, बल्कि उन ईमानदार अधिकारियों के प्रयासों को भी धुंधला कर देती हैं जो वास्तव में सिस्टम को बेहतर बनाने में जुटे हैं।

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