
मऊगंज- क्षेत्र में इंसाफ की मांग पर लपटें उठीं। एक शराब दुकान के कर्मचारी की संदिग्ध और पीड़ादायक मौत के बाद सोमवार को परिजनों ने लौर थाने के सामने शव रखकर जमकर हंगामा किया। मामला गंभीर होता देख कलेक्टर और एसपी को मौके पर पहुंचना पड़ा। घटना 21 मई की रात करीब 12 बजे की है, जब ग्राम पताई में कुछ अज्ञात लोगों ने शराब दुकान पर तैनात दो कर्मचारियों पर हमला कर दिया। इस हमले में गंभीर रूप से घायल मनोज पटेल (उम्र 30 वर्ष) को इलाज के लिए रीवा से नागपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में कटनी के पास उसने दम तोड़ दिया। मौत की खबर जैसे ही परिजनों को मिली, उनका गुस्सा भड़क उठा। सोमवार सुबह मनोज पटेल के परिजन शव को लेकर सीधे लौर थाने पहुंच गए। आक्रोशित भीड़ ने थाने के सामने धरना शुरू कर दिया। दो पुलिसकर्मियों और थाना प्रभारी पर कार्रवाई की मांग करते हुए परिजनों ने कहा कि अगर समय रहते पुलिस सक्रिय होती तो मनोज की जान बच सकती थी। थाने के बाहर शव रखकर दो घंटे तक नारेबाज़ी होती रही, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिला कलेक्टर संजय जैन और पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को कार्रवाई का भरोसा दिलाया और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

कलेक्टर संजय जैन ने कहा, “जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसपर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” यह आश्वासन मिलने के बाद परिजन शव को पोस्टमार्टम के लिए मऊगंज सिविल अस्पताल ले गए। वहीं, पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी ने बताया कि इस हमले के संबंध में तीन अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा, “हमलावरों की तलाश जारी है, उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।” इस पूरी घटना ने न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानून व्यवस्था की स्थिति कितनी नाजुक है। सवाल यह है कि आखिर एक शराब दुकान में काम कर रहा व्यक्ति भी अब सुरक्षित क्यों नहीं है?
फिलहाल परिजन इंसाफ की आस में हैं, और मऊगंज का प्रशासन जांच के भरोसों पर टिका है। लेकिन असली जवाब तब मिलेगा जब मनोज की मौत के असली गुनहगार सलाखों के पीछे होंगे।













