
मऊगंज शनिवार की दोपहर एक और दर्दनाक हादसे ने क्षेत्र को झकझोर दिया जब एक बोलेरो गाड़ी अज्ञात वाहन की चपेट में आकर पिपराही घाटी की गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि चालक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान 32 वर्षीय रजनीश कुमार सेन पुत्र रंगलाल सेन, निवासी घोघम चौराहा के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार बोलेरो (क्रमांक MP17 CA/1904) सीधी में बारात छोड़कर घर लौट रही थी। जैसे ही वाहन गोलहथा देवी मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर आगे बढ़ा, तभी दोपहर करीब 3 बजे एक अज्ञात वाहन ने बोलेरो को सामने से जबरदस्त टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि बोलेरो सीधा घाटी में लुढ़कती चली गई। वाहन कई फीट नीचे जा गिरा और चकनाचूर हो गया।
स्थानीय ग्रामीणों ने जब खाई में गिरे वाहन को देखा तो दौड़कर मदद के लिए पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। चालक रजनीश की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद हनुमना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हनुमना भिजवाया, लेकिन शाम होने की वजह से पोस्टमार्टम संभव नहीं हो सका। शव को फिलहाल मर्चुरी में रखवा दिया गया है, जिसका पोस्टमार्टम रविवार को किया जाएगा।
हादसे के बाद कई सवाल
यह हादसा केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम पर तमाचा है। आखिर ऐसी दुर्घटनाएं कब तक होती रहेंगी? क्षेत्र की सड़कों पर चल रहे तेज रफ्तार और नियमों से बेखौफ वाहन चालकों पर कोई लगाम क्यों नहीं लगाई जा रही? पिपराही घाटी जैसे संवेदनशील इलाकों में न तो कोई स्पीड कंट्रोल व्यवस्था है, न ही कोई सीसीटीवी कैमरे, जिससे ऐसे अज्ञात वाहनों की पहचान हो सके।
हर बार की तरह इस बार भी “अज्ञात वाहन” का नाम लेकर मामला दर्ज हो जाएगा, लेकिन जिम्मेदार कौन है? क्या प्रशासन की जिम्मेदारी केवल पंचनामा भरने और शव को मर्चुरी में भेजने तक ही सीमित है?
परिवार में मचा कोहराम
रजनीश की मौत से उसके घर में मातम पसरा हुआ है। पूरे गांव में शोक का माहौल है। रजनीश अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाला था। अब उसके बूढ़े माता-पिता और परिवार के सामने जीवन जीने का संकट खड़ा हो गया है।
मांग उठी—अज्ञात वाहन की तत्काल पहचान हो
ग्रामीणों और परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल अज्ञात वाहन का पता लगाकर आरोपी चालक को गिरफ्तार किया जाए और मृतक परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। साथ ही, पिपराही घाटी जैसे हादसों के अड्डे बन चुके मार्गों पर निगरानी के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हो सकें।













