नवीन कृषि उपज मंडी बनी भ्रष्टाचार का ‘भीगा’ अड्डा: 10 दिनों से हो रही बारिश के बाद भी नहीं जागे अधिकारी, कलेक्टर संजय जैन से कार्रवाई की मांग!

मऊगंज। मऊगंज जिले के हनुमना स्थित नवीन कृषि उपज मंडी परिसर में इन दिनों सरकारी धान की दुर्गति और अधिकारियों की संवेदनहीनता का चरम नजारा देखने को मिल रहा है। 4 मई 2026 की शाम को हुई भीषण बारिश ने एक बार फिर प्रशासन के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें अनाज को सुरक्षित रखने की बात कही जाती थी। हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे महज नाममात्र के तिरपालों के भरोसे छोड़ दी गई थी, जो अब बारिश के पानी में पूरी तरह भीग चुकी है।
लापरवाही की हद: न चपरासी मिला, न अधिकारी
हैरानी की बात यह है कि जब शाम 5 बजे तेज बारिश शुरू हुई, उस समय मंडी परिसर में धान को सुरक्षित करने वाला कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी या चपरासी तक मौजूद नहीं था। कई लाट तो बिना तिरपाल के ही खुले पड़े रहे, वहीं नीचे से बहते पानी ने भी धान की बोरियों को अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धान की ऐसी बर्बादी देखकर किसी का भी दिल दहल जाए, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी।
अतरैला जैसी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
बता दें कि पिछले 10 दिनों से मौसम का मिजाज बार-बार बदल रहा है और कई बार बारिश हो चुकी है। इसके बावजूद विपणन सहकारी समिति और मंडी प्रशासन ने गत वर्ष की गलतियों से कोई सबक नहीं लिया। पिछले साल भी भारी बारिश के चलते बड़ी मात्रा में धान खराब हुई थी, लेकिन इस बार तो लापरवाही ने सारी हदें पार कर दी हैं।
कलेक्टर से गुहार:
“साहब की तनख्वाह से हो भरपाई” इस भीषण बर्बादी को देख स्थानीय नागरिकों और किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन का ध्यान आकृष्ट करते हुए मांग की है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध न केवल सख्त कार्रवाई की जाए, बल्कि धान के नुकसान की भरपाई उनकी तनख्वाह से की जाए।
एक तरफ किसान मेहनत कर सरकार को अनाज दे रहा है, और दूसरी तरफ अधिकारी उसे सड़ाने में लगे हैं। क्या मोहन सरकार इन ‘कुर्सी तोड़ने’ वाले बाबुओं पर बुलडोजर चलाएगी जो राष्ट्रीय संपत्ति को बर्बाद होने के लिए छोड़ देते हैं? ‘इंडिया हेडलाइन 24’ इस मुद्दे को तब तक उठाता रहेगा जब तक दोषियों पर गाज नहीं गिरती।













