मऊगंज पुलिस का बड़ा एक्शन: 5 महीने से चकमा दे रहा ‘लील्बू’ चढ़ा हत्थे, लोहे की रॉड से किया था जानलेवा हमला!

मऊगंज के लौर थाना क्षेत्र में खूनी संघर्ष के बाद फरार चल रहे मुख्य आरोपी को पुलिस ने धर दबोचा है। पुराने जमीन विवाद में बेहरहमी से मारपीट करने वाला आरोपी अब सलाखों के पीछे है।

मऊगंज: मऊगंज पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी के “अपराध मुक्त मऊगंज” अभियान के तहत लौर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ग्राम डगडौआ नं. 02 में हुए जानलेवा हमले के मामले में पिछले 5 महीनों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी पुष्पेन्द्र आदिवासी उर्फ लील्बू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

क्या था पूरा मामला?

बीते 14 नवंबर 2025 को डगडौआ निवासी रेखा पाण्डेय ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गांव के ही ज्ञानेन्द्र सिंह, दिलीप, रंजीत, गीता और पुष्पेन्द्र आदिवासी ने पुरानी रंजिश और जमीन विवाद (बारी) को लेकर उनके पति और देवर पर हमला कर दिया था। आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए लोहे की रॉड, लाठी और डंडों से राजेश पाण्डेय और राकेश पाण्डेय को अधमरा कर दिया था।

पुलिस की घेराबंदी और गिरफ्तारी

घटना के बाद से ही आरोपी फरार थे। मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले में धारा 118(2) BNS भी जोड़ दी थी। मुखबिर की सटीक सूचना पर 10 अप्रैल 2026 को लौर थाना प्रभारी राजेश पटेल की टीम ने घेराबंदी कर मुख्य आरोपी ‘लील्बू’ को दबोच लिया।
मऊगंज पुलिस का यह कदम सराहनीय है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है—बाकी आरोपी कहाँ छिपे हैं? पुलिस की टीम (सउनि दिलराज सिंह, आरक्षक वीरेन्द्र शुक्ला, रामकरण और नन्नू वास्केल) शेष अपराधियों की तलाश में जुटी है। कानून के हाथ लंबे हैं, और जल्द ही बाकी आरोपी भी सलाखों के पीछे होंगे।

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