
मऊगंज जिले की जिलहड़ी पंचायत में 68 लाख रुपए के कथित घोटाले को ‘मैनेज’ करने से जुड़ा एक ऑडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। वायरल ऑडियो में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एस.बी. रावत और सब इंजीनियर प्रवीण पांडेय कथित तौर पर कलेक्टर, न्यायालय और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अमर्यादित बातें करते हुए सुनाई दे रहे हैं। बातचीत में दोनों अधिकारी यह कहते हुए भी सुने गए— “पैसे से सब कुछ मैनेज हो जाता है।” इस टिप्पणी के बाद जिले का प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया।
ऑडियो सामने आते ही मऊगंज कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से सब इंजीनियर प्रवीण पांडेय की संविदा सेवा समाप्त कर दी थी। अब, कलेक्टर के प्रस्ताव पर रीवा संभागायुक्त ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एस.बी. रावत को निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश जारी होने के बाद रावत को कलेक्टर कार्यालय रीवा में अटैच किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि ऑडियो में की गई टिप्पणियाँ न केवल न्यायालय की गरिमा पर आघात हैं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता को भी चोट पहुँचाती हैं। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रावत को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया था, लेकिन उनका जवाब असंतोषजनक पाया गया। इसके बाद ही यह कठोर कार्रवाई की गई।
इस प्रकरण में भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मिश्रा और सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट बी.के. माला ने संभागायुक्त से मुलाकात कर कठोर कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना था कि इस तरह की बातें पूरे प्रशासनिक ढांचे की छवि को धूमिल करती हैं और सरकारी व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर करती हैं।
गौरतलब है कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एस.बी. रावत का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले भी उन पर सेवा पुस्तिका में छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लग चुका है। उस मामले की जांच में उन्हें दोषी माना गया था और वह प्रकरण अभी भी लंबित है।
संभागायुक्त कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय, कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियाँ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। यह कार्रवाई प्रशासन की अनुशासनहीनता के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है। जिलहड़ी पंचायत के 68 लाख रुपए के इस कथित घोटाले से जुड़ा मामला अब जिला से लेकर संभाग स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।













