मऊगंज: एक तरफ विकास की गंगा बहाने के सरकारी दावे हैं, तो दूसरी तरफ हकीकत की जमीन पर केवल आदेशों का सूखा और धुएँ का गुबार पसरा हुआ है।

मऊगंज के जिलाधिकारी (कलेक्टर) महोदय लगातार जनहित और विकास को लेकर आदेश पर आदेश जारी कर रहे हैं। ऐसा लगता है, मानो सिस्टम को पटरी पर लाने के लिए वे अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उनकी आवाज केवल उनके दफ़्तर तक ही सीमित रह गई है? क्या उनके अधिकारी, जिन्हें इन आदेशों पर अमल करना है, उन्होंने अपने कानों में तेल डाल रखा है?
नरवाई की आग: सिर्फ खेत नहीं, नियम जल रहे हैं!
हाल ही में, कलेक्टर महोदय ने नरवाई जलाने पर सख्त रोक लगाने का एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। यह आदेश सिर्फ पर्यावरण को बचाने के लिए नहीं था, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट निर्देशों का पालन भी था।
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कलेक्टर का आदेश: स्पष्ट और कठोर था कि नरवाई जलाने वालों पर नियमतः कार्रवाई की जाएगी।
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मैदान की हकीकत: फरहदा, कुलबहेरिया, खैरा, कनकेसरा… इन गाँवों के खेतों से उठती आग और धुएँ की लपटें दिनदहाड़े इस बात की गवाही दे रही हैं कि कलेक्टर के आदेश को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया है।
हैरानी की बात यह है कि खेतों से मीलों दूर तक धुआँ उठता है, लेकिन एक भी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं होता। ऐसा लगता है, मानो इन सभी ने एक अघोषित मौन सहमति बना ली है कि कलेक्टर कुछ भी कहें, हम अपनी आँखें बंद रखेंगे।
नियम क्या कहता है? और कौन है जिम्मेदार?
कलेक्टर का आदेश सीधे तौर पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 (सरकारी सेवक के विधिवत् आज्ञा का उल्लंघन) और वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत कार्रवाई का प्रावधान करता है।
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नियमतः कार्रवाई: नरवाई जलाने पर जुर्माने से लेकर जेल तक का प्रावधान है।
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सवाल अधिकारियों पर: जब नियम तोड़ने वाले साफ दिख रहे हैं, तब भी कृषि विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी क्यों मौन हैं? क्या यह सीधे तौर पर कलेक्टर के आदेश की अवमानना नहीं है?
यह स्थिति बताती है कि मऊगंज में कलेक्टर महोदय के आदेशों का वजन कितना है। जब उनके महत्वपूर्ण आदेशों को ही उनके अधीनस्थ अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं, तो आम जनता से नियम पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
हमारी कलम, मऊगंज प्रशासन से यह सवाल पूछती है: क्या यह सिस्टम की लापरवाही है या फिर कलेक्टर के आदेशों के प्रति जानबूझकर दिखाई गई ‘बगावत’?













