जनपद हनुमना में उपयंत्री पर कार्रवाई की तलवार – लापरवाही या पद का दुरुपयोग?

मऊगंज, मध्यप्रदेश – जिले में प्रशासनिक लापरवाही एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार कटघरे में हैं जनपद पंचायत हनुमना के उपयंत्री श्री आर.के. पटेल, जिनके खिलाफ कलेक्टर मऊगंज ने सख्त तेवर अपनाते हुए कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। यह पत्र केवल एक औपचारिक चेतावनी नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर उठते सवालों का प्रतिबिंब है। दरअसल, ग्राम पंचायत देवरीहसनाखुर्द में स्टॉप डेम निर्माण का कार्य चल रहा है, जो जल संरचना विकास की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। इस कार्य को लेकर स्वयं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा स्थल पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अफसोस की बात यह है कि उपयंत्री श्री पटेल ने इस आदेश की न केवल अनदेखी की, बल्कि जनसुनवाई जैसे गंभीर मंच पर भी विवादित ढंग से उपस्थित होकर पूरे माहौल को शर्मसार कर दिया। कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार, पटेल न केवल निर्देशों की अनदेखी करते पाए गए, बल्कि उनके द्वारा किसी भी शिकायत का निवारण भी नहीं किया गया। इससे यह प्रतीत होता है कि वे न तो अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर हैं और न ही जनहित की प्राथमिकता को समझते हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह आचरण सीधे-सीधे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 तथा 1966 के नियम 10 का उल्लंघन है, जो पद के दुरुपयोग और लापरवाही की श्रेणी में आता है।

सूत्र बताते हैं कि यह कोई पहली घटना नहीं है। स्थानीय स्तर पर भी पटेल पर पहले से ही ‘साइट से गायब रहने’ और ‘निर्माण कार्यों में अनियमितता’ को लेकर फुसफुसाहटें रही हैं, लेकिन अब कलेक्टर की सीधी चेतावनी से यह स्पष्ट है कि मामला अब बर्दाश्त के बाहर हो गया है। कलेक्टर ने उन्हें 7 दिवस की समय सीमा में लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता है, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही तय मानी जा रही है। इस पत्र की प्रतिलिपि रीवा और जनपद पंचायत हनुमना के उच्चाधिकारियों को भी भेजी गई है, जिससे यह साफ होता है कि अब ‘ढिलाई का दौर’ समाप्त हो चुका है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी कर्मचारी अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारी को समझते हैं या फिर पद केवल सत्ता और सुविधाओं का साधन बनकर रह गया है? मऊगंज प्रशासन की यह सख्ती निश्चित तौर पर एक संदेश है—कि जनता के टैक्स से मिलने वाली तनख्वाह का उपयोग निजी सुविधा नहीं, जनहित के लिए होना चाहिए।

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