
रीवा, क्या आपने कभी यह कल्पना की है कि एक हत्या का आरोपी, जो पुलिस की कस्टडी में हो, हथकड़ी पहने हुए आराम से मोबाइल पर रील बना रहा हो और पुलिस बस तमाशबीन बनी खड़ी हो? नहीं न? लेकिन यह कल्पना अब हकीकत बन चुकी है—और वह भी मध्यप्रदेश के रीवा जिले में। हत्या का गंभीर आरोप झेल रहा वैभव ठाकुर पुलिस की निगरानी में न केवल मोबाइल फोन चला रहा था, बल्कि बकायदा रील बना रहा था। यह सब खुलेआम हुआ, और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुका है। वीडियो रीवा के संजय गांधी अस्पताल का बताया जा रहा है, जहां आरोपी को इलाज के नाम पर ले जाया गया था। लेकिन अस्पताल में जो हुआ, उसने पूरे पुलिस सिस्टम पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी हथकड़ी पहने है, एक हाथ में मोबाइल है और वह बिंदास अंदाज में पोज़ देता हुआ रील बना रहा है। वह इस कदर बेखौफ है जैसे वह किसी फिल्म का हीरो हो और पुलिसकर्मी उसके बॉडीगार्ड। अब सवाल यह है कि एक हत्या के आरोपी के पास मोबाइल आया कैसे? और उससे भी बड़ा सवाल, पुलिसकर्मी क्या कर रहे थे उस वक्त? क्या वे जानबूझकर आंखें मूंदे रहे? या फिर कोई ‘खास सेवा शुल्क’ इस VIP ट्रीटमेंट के बदले में दी गई थी?
कहानी के पीछे का खून
वीडियो में दिख रहा आरोपी वैभव ठाकुर, 2018 में टीआरएस कॉलेज कैंपस में एक छात्र की गोली मारकर हत्या करने के मामले में जेल की हवा खा रहा है। यह मामला उस समय पूरे जिले में सनसनी बन गया था। और अब, सालों बाद वही आरोपी कानून की धज्जियां उड़ाता हुआ वायरल हो रहा है।
पुलिस की चुप्पी और लीपापोती
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने मामले की जांच के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन यह कार्रवाई तब क्यों नहीं हुई जब आरोपी मोबाइल चला रहा था? क्या पुलिस को यह सब दिखाई नहीं दिया? या फिर ये “अनदेखी” जानबूझकर की गई?जिन पुलिसकर्मियों की निगरानी में आरोपी को अस्पताल लाया गया था, उनकी भूमिका अब कटघरे में है। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है, लेकिन यह भी एक रस्म अदायगी ही लगती है। क्या सिर्फ जवाब मांगने से जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?
कानून का मज़ाक या सिस्टम की नालायकी?
यह घटना सिर्फ एक वीडियो नहीं है, यह सिस्टम के उस सड़ांध की तस्वीर है जिसमें आरोपी खुलेआम कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं और पुलिस खामोशी से तमाशा देख रही है। ये वही पुलिस है जो आम आदमी से मोबाइल निकलवाने के नाम पर तलाशी लेती है, लेकिन हत्या के आरोपी को रील बनाने के लिए मोबाइल थमा देती है।अगर अब भी सरकार और सिस्टम नहीं जागा, तो वह दिन दूर नहीं जब आरोपी अदालत से पहले इंस्टाग्राम पर अपना पक्ष रखेगा और फैसला भी वहीं से आएगा।
अब ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए
इस पूरे मामले में दोषियों पर सिर्फ कार्रवाई की रस्म अदायगी नहीं, सख्त सज़ा मिलनी चाहिए। दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाए, न कि सिर्फ स्पष्टीकरण लेकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए। और अगर कोई बड़ा अधिकारी भी इस घोटाले में शामिल है तो उसकी भी जवाबदेही तय की जाए। क्योंकि जब हत्यारे मोबाइल से रील बना रहे हों और पुलिस मूकदर्शक बनी हो—तो समझ लीजिए, न्याय की देवी की आंखों पर सिर्फ पट्टी नहीं है, अब वो भी सोशल मीडिया पर व्यस्त है।













