
मऊगंज (नईगढ़ी)। मध्यप्रदेश के नवीन जिला मऊगंज की कानून व्यवस्था अब महज़ कागज़ों तक सिमट कर रह गई है। पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नाक के नीचे जंगलराज बेखौफ पनप रहा है, और हालात ऐसे हो चुके हैं कि अब न आम जनता सुरक्षित है और न ही वर्दीधारी। ताज़ा मामला नईगढ़ी थाना क्षेत्र के हड़िया गांव का है, जहाँ रितेंद्र पाण्डेय नामक युवक को खुलेआम अगवा कर लिया गया। पहले उसे बंधक बनाया गया, फिर लात-जूतों और बेल्ट से बेरहमी से पीटा गया। जब इतने में भी दरिंदों का मन नहीं भरा तो रॉड और सरिये से उसे बुरी तरह मारा गया। ये सब कुछ एक सुनियोजित साजिश के तहत हुआ और हैरत की बात यह है कि इस पूरे मामले में प्रशासन नाम की कोई चीज़ दूर-दूर तक नज़र नहीं आई। जिन लोगों पर इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने का आरोप है, उनमें राजू पाण्डेय (पुत्र शीतला प्रसाद पाण्डेय) और मोहित दुबे (पुत्र राजेश उर्फ गुड्डू दुबे) सहित कई और नाम शामिल हैं — ये सभी हड़िया गांव के रहने वाले हैं और तेंदुआ की तरफ जा रहे रितेंद्र पाण्डेय पर जानलेवा हमला करने के आरोपी हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि इन अपराधियों के खिलाफ पहले से ही 26 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हथियारों से लैस होकर हमला करना, पिस्टल लहराकर धमकाना और कोरेक्स जैसे प्रतिबंधित नशे का व्यापार करना शामिल है। इसके बावजूद भी ये खुलेआम घूम रहे हैं — मानो कानून इनका नौकर हो और पुलिस इनकी सुरक्षा में तैनात हो। नईगढ़ी थाने की भूमिका पर सवाल उठना लाज़मी है। बजाय कड़ी कार्रवाई के, थाना महज खानापूर्ति करते हुए ‘समान धाराएं’ लगाकर आरोपियों को बचाने में जुटा है। यही वजह है कि अपराधियों का हौसला और बढ़ गया है। एक तरफ जहां पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, वहीं अपराधी सरेआम घूम रहे हैं, सोशल मीडिया पर वीडियो डाल रहे हैं, और पुलिस तमाशबीन बनी बैठी है।गड़रा गांव में हुए हालिया हिंसक घटनाक्रम के बाद से पूरे मऊगंज जिले में अपराधियों का मनोबल सातवें आसमान पर है। ये घटनाएं चीख-चीखकर कह रही हैं कि मऊगंज अब अपराधियों का अड्डा बनता जा रहा है और प्रशासन या तो डर गया है या बिक चुका है।
प्रश्न यह नहीं कि आगे क्या होगा — प्रश्न यह है कि अब तक कुछ हुआ क्यों नहीं?
क्या एसपी दिलीप सोनी इस कानून व्यवस्था की गिरती हुई साख को संभाल पाएंगे या मऊगंज आने वाले दिनों में पूरी तरह से अराजकता की गिरफ्त में चला जाएगा?
प्रशासन को अब यह तय करना होगा कि वह अपराधियों के साथ खड़ा है या जनता के साथ।
क्योंकि अगर अब भी मूकदर्शक बना रहा गया, तो आने वाले दिनों में मऊगंज “नवीन जिला” नहीं, बल्कि “नवीन अपराध नगरी” के नाम से जाना जाएगा।













