
मऊगंज। कहते हैं कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, और इस बात को मऊगंज के सामाजिक कार्यकर्ता *सुलेन्द्र गुप्ता “गेंदे बाबू”* ने अपने कर्मों से साबित किया है। मऊगंज जिले में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने गेंदे बाबू का नाम न सुना हो — एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने राजनीति और समाज सेवा दोनों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। सुलेन्द्र गुप्ता पहले भाजपा में मंडल अध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं। उस कार्यकाल में उन्होंने न केवल संगठन को मजबूत किया बल्कि आम जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएँ सुनीं और उनके समाधान के लिए सदैव तत्पर रहे। जनता के सुख-दुःख में हमेशा साथ रहने वाले गेंदे बाबू ने गरीबों की मदद, धार्मिक आयोजनों में सहयोग, और सामाजिक एकता के प्रयासों से लोगों का दिल जीता।उनकी सक्रियता और जनसेवा को देखते हुए वे विधायक *प्रदीप पटेल* के भी करीबी माने जाते रहे। मीडिया में कई बार उनकी सामाजिक पहलों और जनहित के कार्यों की चर्चा होती रही। हालांकि, इस दौरान उन्हें विरोधियों की आलोचनाओं और आरोपों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। विपक्षियों के आरोपों से बेपरवाह होकर वे निरंतर जनता के बीच बने रहे और सहयोग की भावना के साथ काम करते रहे। उनकी निष्ठा और सेवा भावना को देखते हुए *अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य समाज* के राष्ट्रीय अध्यक्ष के.के. गुप्ता ने उन्हें *जिला अध्यक्ष* नियुक्त किया। यह सम्मान उनके वर्षों की मेहनत और सामाजिक समर्पण का प्रतीक है। अध्यक्ष बनने के बाद गेंदे बाबू ने अपने नेतृत्व में व्यापारी संघ का एक ऐतिहासिक कार्यक्रम मऊगंज में आयोजित कराया, जिसमें व्यापारियों और समाजसेवियों की बड़ी संख्या शामिल हुई। गेंदे बाबू ने कहा — “मेरा एकमात्र उद्देश्य जनता और समाज की सेवा करना है। यदि मुझे किसी भी मंच से समाज या विकास के लिए काम करने का अवसर मिलता है, तो मैं निस्वार्थ भाव से उस जिम्मेदारी को निभाऊँगा। हर वर्ग और हर समाज के लोगों की सेवा करना मेरे जीवन का सौभाग्य है।” उन्होंने आगे बताया कि वे कई जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और सांसदों से भी मुलाकात कर चुके हैं और मऊगंज क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि निष्ठा और सहयोग की भावना से होता है। *गेंदे बाबू* की यही सोच उन्हें आम नेताओं से अलग करती हैवे जनता के दिलों में एक सेवक के रूप में जगह बना चुके हैं — जो यह साबित करता है कि अगर नीयत साफ हो, तो सेवा ही सबसे बड़ी पहचान बन जाती है।













