
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना *कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)* आज देश के सुदूर गांव-गांव तक पहुंच चुकी है। इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को सरकारी और गैर-सरकारी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती हैं। रीवा और मऊगंज जिले के सीएससी जिला प्रबंधक *रविशंकर मिश्रा* और *विक्रम पांडे* ने लगातार कोशिश की है कि केंद्र सरकार की यह योजना प्रत्येक पंचायत तक पहुंचे और ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं का लाभ मिले। सीएससी के माध्यम से आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों के लिए आवेदन की सुविधा मिल रही है। इसके अलावा बैंकिंग, बीमा, ऋण, शिक्षा, कौशल विकास, ऑनलाइन ट्रेनिंग, टेलीमेडिसिन, स्वास्थ्य जांच, कृषि सेवाएं, बिल भुगतान, टिकट बुकिंग और इंटरनेट जैसी अनेकों सुविधाएं ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जिन वीएलई (Village Level Entrepreneur) और जिला प्रबंधकों ने दिन-रात मेहनत कर इन योजनाओं को हर गांव तक पहुंचाने का कार्य किया है, उन्हें 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर सम्मान क्यों नहीं दिया जाता? हर बार रीवा और मऊगंज के कलेक्टर किसी भी नोटिस या आदेश की बात हो तो जिला प्रबंधकों को तुरंत जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन जब सम्मान देने की बात आती है तो उन्हें और उनके वीएलई को दरकिनार कर दिया जाता है। * “पिछले 10 वर्षों से लगातार वीएलई गांव-गांव तक योजनाओं को पहुंचा रहे हैं। लेकिन किसी वीएलई को 15 अगस्त और 26 जनवरी के मौके पर कभी सम्मानित किया गया।
यह स्थिति गंभीर सवाल खड़ा करती है कि जब प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने वाले जमीनी योद्धा ही उपेक्षित रह जाएंगे, तो भविष्य में ग्रामीणों तक योजनाओं की पहुंच और उनके प्रति जागरूकता कैसे बढ़ पाएगी? क्या यह उचित नहीं होगा कि इन वीएलई और जिला प्रबंधकों को राष्ट्रीय पर्वों पर सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया जाए?













