
रीवा ज़िले के फरेंदा गांव के लाल, वीर चक्र सम्मानित शहीद दीपक सिंह को उनकी 5वीं पुण्यतिथि पर क्षेत्रवासियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से भिड़ते हुए देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले इस सपूत की याद में आयोजित यह कार्यक्रम एक सजीव उदाहरण था कि “शहीद कभी मरते नहीं, वो दिलों में ज़िंदा रहते हैं।” कार्यक्रम की शुरुआत एक मैराथन दौड़ से हुई, जिसे दीपक सिंह के भाई प्रकाश सिंह और कमलेश्वर सिंह की अगुवाई में संपन्न किया गया। दौड़ के जरिए युवाओं को देशभक्ति, साहस और समाजसेवा के प्रति प्रेरित किया गया। इस मौके पर अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।

वरिष्ठ समाजसेवी विनोद कुमार पांडेय ने पुष्प अर्पित करते हुए दीपक सिंह के योगदान को याद किया और कहा, “एक बेटा तो गलवान में मिट गया, लेकिन उसकी याद में आज सैकड़ों दीपक जल उठे हैं।” बद्री प्रसाद मिश्र ने कहा कि, “ऐसी शहादतों को केवल याद ही नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि नई पीढ़ी को इनके पदचिन्हों पर चलने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए।”

कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकार अनिल कुमार गुप्ता ने ग़ज़ब का संदेश दिया – अगर आप दीपक सिंह को सच में श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो आज ही एक पौधा लगाएं। यह प्रकृति और देश दोनों के लिए सम्मान होगा। कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया जब पशु चिकित्सक शिवानी गुप्ता ने शहादत पर एक हृदयस्पर्शी गीत प्रस्तुत किया, जिससे उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।

कार्यक्रम में मऊगंज से आए आर्मी मित्रों समेत क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और आमजन उपस्थित रहे।
भूपेंद्र तिवारी, उमेश मिश्रा, अजय वर्मा, कुंवर बहादुर सिंह, जगपति सिंह, कमलेश सोधिया, अखण्ड सिंह, शैलेन्द्र सिंह, कमलेश तिवारी, संतोष सिंह, दिवाकर सिंह गहरवार, सुखेन्द्र त्रिपाठी और अनुराग शुक्ल जैसे दर्जनों नागरिकों ने मंच से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और दीपक सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि दी।

इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शहीदों की शहादत बेकार नहीं जाती, बल्कि वो आने वाली पीढ़ियों के लिए मशाल बन जाती है। आज फरेंदा नहीं, पूरा रीवा दीपक सिंह को याद कर रहा है — उस दीपक को, जो खुद बुझकर हम सबके लिए रोशनी छोड़ गया।













