
मऊगंज:- लौर थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़वा स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (जो सीतापुर में संचालित हो रही थी) से गरीबों का हक डकारने वाली 70 से 80 बोरी खाद्यान्न चोरी मामले में मऊगंज पुलिस और खाद्य विभाग का शर्मनाक रवैया सामने आया है। मीडिया में खबर प्रमुखता से उजागर होने के पूरे 8 दिन बाद जैसे-तैसे लौर थाने के बीट प्रभारी जांच करने मौके पर पहुंचे थे, लेकिन शुरुआत में हीला-हवाली करने वाले पुलिस अफसरों की सुस्ती का आलम यह है कि आज घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद भी न तो मामले का कोई सुराग लगा है और न ही अब तक पुलिस के ऑनलाइन रोजनामचे (FIR/जांच) में रिपोर्ट दर्ज की गई है। सवाल यह उठ रहा है कि गरीबों के पेट पर डाका डालने वाले इतने बड़े खाद्यान्न घोटाले में आखिर खाद्य विभाग (फ़ूड इंस्पेक्टर) और पुलिस प्रशासन इतने बेपरवाह क्यों हैं? जब लौर थाने में नई थाना प्रभारी रीना सिंह की पदस्थापना हुई थी, तो क्षेत्र की जनता को उम्मीद जगी थी कि इस राशन चोरी गिरोह और इसके पीछे के सफ़ेदपोशों का जल्द पर्दाफाश होगा। लेकिन बेहद अफसोस का विषय है कि नए थाना प्रभारी के आने के बाद भी पूरी फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। 12 दिन से न तो ऑनलाइन केस दर्ज होना और न ही संदिग्ध सेल्समैन व प्रबंधकों से सख्ती से पूछताछ होना, यह सीधे तौर पर इशारा कर रहा है कि क्या अब प्रशासनिक अधिकारी ही इस खाद्यान्न घोटाले पर लीपापोती की चादर ओढ़ाने में लगे हुए हैं? जब गरीब हितग्राही दाने-दाने को मोहताज हैं, तब 80 बोरी राशन का हवा में गायब हो जाना और पुलिस-प्रशासन का हाथ पर हाथ धरकर बैठे रहना बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है। जनता अब सीधे मऊगंज एसपी और कलेक्टर से मांग कर रही है कि इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर फर्जीवाड़े में शामिल जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, वरना यह आंदोलन वेबसाइटों से निकलकर कलेक्ट्रेट के दरवाजों तक पहुंचेगा।













