
मऊगंज । कहते हैं कि जब प्रशासनिक कुर्सी पर सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और सहृदय इंसान बैठता है, तो व्यवस्था खुद-ब-खुद आम जनता के आंसू पोंछने के लिए दौड़ पड़ती है। ऐसा ही एक बेहद भावुक, आत्मीय और इंसानियत की मिसाल पेश करने वाला नजारा आज जिला मुख्यालय मऊगंज में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान देखने को मिला। कलेक्ट्रेट परिसर में जब भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच तहसील हनुमना के सुदूर लोढ़ी गांव से रेंगते हुए पहुंचे एक बेबस दिव्यांग युवा शिवम कहार ने कलेक्टर आदरणीय संजय कुमार जैन जी के सामने अपनी लाचारी और जिंदगी की जद्दोजहद को रखा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। पिता शिवबहोर कहार के इस होनहार लेकिन शारीरिक रूप से अक्षम बेटे ने जब अत्यंत भरे मन से अपनी शारीरिक स्थिति, पैरों की कमजोरी और रोजमर्रा के आवागमन में होने वाली असहनीय कठिनाइयों की दर्दभरी दास्तां कलेक्टर साहब को सुनाई, तो संवेदनशील जिला मुखिया का दिल पूरी तरह पिघल गया। कलेक्टर संजय कुमार जैन ने औपचारिकता की फाइलों और लालफीताशाही के ढर्रे को दरकिनार करते हुए, शिवम के आवेदन पर तत्काल अपनी मानवीय और प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल किया।
कलेक्टर साहब ने बिना एक पल की भी देरी किए मौके पर ही मौजूद संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए कि इस दिव्यांग युवा को कागजी कार्यवाहियों के चक्रव्यूह में उलझाने के बजाय तुरंत राहत दी जाए। कलेक्टर के निर्देश मिलते ही पूरा अमला हरकत में आया और पात्रता की जांच कर तत्काल कलेक्ट्रेट परिसर में ही पीड़ित हितग्राही शिवम कहार को एक चमचमाती हुई ट्राई-साइकिल सौंप दी गई। जैसे ही शिवम के हाथों में उस ट्राई-साइकिल का हैंडल आया, उसकी आंखों से बरसों की बेबसी के आंसू खुशी बनकर छलक पड़े। इस भावुक कर देने वाले पल को देखकर वहां उपस्थित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी और आम जनमानस भी पूरी तरह भावुक हो उठे। संकट की इस घड़ी में भगवान बनकर आए मऊगंज कलेक्टर के इस रूप को देखकर शिवम कहार और उनके साथ आए वृद्ध परिजनों ने भरभराए गले से जिला प्रशासन और विशेषकर कलेक्टर संजय कुमार जैन जी के प्रति हाथ जोड़कर अपना गहरा आभार व्यक्त किया। परिजनों ने नम आंखों से दुआएं देते हुए कहा कि इस अप्रत्याशित और त्वरित सहायता ने शिवम के अंधकारमय जीवन में आत्मनिर्भरता की एक नई रोशनी भर दी है, जिससे अब उसके दैनिक जीवन का सफर बेहद आसान हो जाएगा। मऊगंज कलेक्टर का यह सरल, सुलभ और अत्यंत संवेदनशील रवैया आज पूरे जिले में सुशासन और मानवता की एक ऐसी अमिट इबारत लिख गया है, जो आने वाले समय में हर पीड़ित के लिए संबल बनेगी।













