अधूरे निर्माण और अवैध पार्किंग ने छीनीं कई जानें; सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ रही धज्जियां, ‘खूनी’ हाईवे पर कब जागेगा सड़क प्रबंधन?

मऊगंज। मऊगंज और रीवा जिले से गुजरने वाले रीवा-हनुमना एवं मनगवां-चाकघाट नेशनल हाईवे इन दिनों यात्रियों के लिए सफर नहीं, बल्कि मौत का जाल बन चुके हैं। जिस रफ्तार से इन दोनों हाईवे पर दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा है, वह सड़क प्रबंधन की घोर लापरवाही और नियमों की सरेआम अनदेखी की कहानी बयां कर रहा है। जगह-जगह कटे डिवाइडर और अधूरे पड़े सर्विस रोड अब राहगीरों के लिए काल साबित हो रहे हैं।
अवैध कट्स और सर्विस रोड का अभाव
हाईवे के हालात इस कदर बदतर हैं कि बिना किसी सांकेतिक चिन्ह के कई जगहों से डिवाइडर अवैध रूप से काट दिए गए हैं। ओवर ब्रिज के पास सर्विस रोड का निर्माण पूरा न होना स्थानीय यातायात को सीधे मुख्य मार्ग पर आने के लिए मजबूर करता है। तेज रफ्तार भारी वाहनों और स्थानीय दोपहिया वाहनों के बीच भीषण टक्कर अब यहाँ आम बात हो गई है। रात के अंधेरे में ये अधूरे निर्माण कार्य किसी ‘डेथ ट्रैप’ से कम नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की खुली अवमानना
सड़क किनारे संचालित होटलों के सामने खड़ी गाड़ियों की लंबी कतारें आए दिन बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। सर्वोच्च अदालत के स्पष्ट निर्देश हैं कि हाईवे के ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) में कोई भी अवैध पार्किंग बर्दाश्त नहीं होगी। इसके बावजूद रीवा से हनुमना तक भारी वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है, जो सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर रहा है।
निराश्रित मवेशी और प्रशासनिक उदासीनता
हाईवे पर चहल-कदमी करते निराश्रित मवेशी वाहन चालकों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। रात के समय अचानक सामने आने वाले पशुओं के कारण कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन की संवेदनहीनता का आलम यह है कि सड़क पर पड़े मृत पशुओं को भी समय पर नहीं हटाया जाता, जिससे गंभीर संक्रमण और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।













