
मऊगंज जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। हनुमना निवासी रूपा गुप्ता को उसके ही ससुराल में इतनी बेरहमी से पीटा गया कि वह मरणासन्न हालत में पहुंच गई। पीड़िता के भाई सूरज गुप्ता और पिता मुरारी गुप्ता (ब्रेड वाले) ने बताया कि उन्होंने रूपा की परवरिश बड़े स्नेह से की थी, उसे पढ़ाया-लिखाया और धूमधाम से शादी करवाई थी, ताकि वह एक खुशहाल जीवन बिता सके। लेकिन यह सपना अब खून और आंसुओं में बदल गया है।
घटना के अनुसार, रूपा गुप्ता के देवर प्रज्वल गुप्ता, जो राजकुमार गुप्ता का बेटा है, ने बीती रात रूपा को बेरहमी से पीटा। वह दर्द से कराहती रही, चीखती रही, लेकिन उसकी सास ने न रोकने की कोशिश की, न मदद की। बताया जा रहा है कि देवर ने तब तक पिटाई की जब तक रूपा अचेत अवस्था में नहीं पहुंच गई।
सुबह जब परिजनों को सूचना मिली, तो उन्होंने उसे तत्काल मऊगंज अस्पताल में भर्ती कराया। पीड़िता की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। परिवार वालों ने मऊगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस की कार्यवाही बेहद धीमी और पक्षपातपूर्ण है।
पीड़िता के भाई सूरज गुप्ता ने मीडिया के माध्यम से मऊगंज कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और दोनों—देवर और सास—के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो यह न्याय प्रणाली पर प्रश्नचिह्न होगा।
घटना को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो जनता आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। यह मामला अब सरकार के उन वादों पर भी सवाल खड़ा कर रहा है जो वह महिलाओं की सुरक्षा को लेकर करती रही है।
लगभग 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह उठता है कि क्या मध्य प्रदेश सरकार की “लाड़ली बहनों” की सुरक्षा सिर्फ भाषणों तक सीमित है? क्या इसी तरह बेटियों के साथ बर्बरता होती रहेगी और प्रशासन खामोश रहेगा?
यह घटना न सिर्फ एक परिवार के दर्द की कहानी है, बल्कि उस व्यवस्था पर भी करारा तमाचा है जो महिलाओं की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है। रूपा गुप्ता को न्याय कब मिलेगा, यह अब प्रशासन की जिम्मेदारी है, और पूरा मऊगंज न्याय की मांग में एकजुट है।













