देवतालाब में बिजली व्यवस्था बदहाल; जनता को जल्द ही मुख्यमंत्री व वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन भेजा जाएगा

देवतालाब। देवतालाब क्षेत्र में लंबित और अनियमित बिजली कटा-छाँट और रात में लगातार होने वाली बिजली गैरहाज़री ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। क्षेत्रीय युवा समाजसेवी और लोकप्रिय युवा नेता देवा भारती ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि रोज़ाना घोषित कटौती, दिन में होने वाली बिजली की आवक-गमन (आओ-जाओ) और रात्रि में अनियमित आपूर्ति से जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

देवा भारती ने बताया कि देवतालाब में समय-समय पर विकास के बड़े-बड़े वादे और घोषणाएँ तो की गईं, मगर आम नागरिकों की सबसे बुनियादी जरूरत—नियमित बिजली सप्लाई—को अनदेखा किया गया है। सरकारें और जिम्मेदार अधिकारी जिनके कन्धों पर यह दायित्व है, वे मौन साधे हुए हैं, जिससे क्षेत्र में सामाजिक जीवन, शिक्षा और रोज़मर्रा के काम काज प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि खासकर गरीब परिवारों के घरों में रात के समय रोशनी की कमी से सुरक्षा व पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

समाजसेवी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन्होंने 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था, उन्होंने वास्तविकता में जनता को अंधकार में छोड़ दिया है। कार्यालयीन तथा घरों के दैनिक कार्य बाधित हैं, छात्र-छात्राओं का पढ़ाई का समय प्रभावित हो रहा है और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियाँ भी ठप हो रही हैं। देवा भारती ने यह भी कहा कि कई बार मीडिया और जनसम्पर्क के माध्यम से समस्या उठाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए अब मौन सहन नहीं किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शीघ्र ही इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी (पूर्वी क्षेत्र) के मुख्यालय तथा जिला व संभाग स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को जनता की ओर से संक्षिप्त परंतु ठोस ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा। अगर ज्ञापन के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन जैसी सख्त कार्रवाई विकल्प के तौर पर रखी जाएगी। देवा भारती ने जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर सम्भव कदम उठाने का आश्वासन देते हुए बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की है कि वे समय रहते समस्या का स्थायी निवारण करें, वरना जनता के प्रतिकार के लिए उन्हें तैयार रहना चाहिए।

समाप्ति में देवा भारती ने कहा, “हम जनता के साथ हैं और उनके हक़ की लड़ाई के लिए जो कुछ भी करना पड़ेगा करेंगे। विकास की बड़ी-बड़ी घोषणाएँ तब तक मायने नहीं रखतीं जब तक आम आदमी के मूलभूत सुविधाएँ — खासकर बिजली और पानी — सुलभ न हों।”

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