
मऊगंज -नईगड़ी थाना क्षेत्र के देवरी सेंगरान गांव से आई एक सनसनीखेज खबर ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। यहां 17 वर्षीय सुमित शर्मा की निर्मम हत्या के करीब 11 महीने बाद भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के मंडल उपाध्यक्ष दुर्गेश तिवारी की गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है! सुमित शर्मा, जो अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था, 15 अगस्त 2023 को स्वतंत्रता दिवस के दिन घर से निकला और फिर कभी लौटकर नहीं आया। अगले दिन उसका शव खेत में खून से सना हुआ मिला, शरीर पर चाकू के कई गहरे घाव थे। गांव के शांत माहौल को उस दिन जैसे किसी ने लहूलुहान कर दिया हो। जांच में यह बात सामने आई कि सुमित का एक लड़की से प्रेम संबंध था, जिसे लड़की का परिवार स्वीकार नहीं कर पा रहा था। धीरे-धीरे शक की सुई अर्पित त्रिपाठी, अनीत त्रिपाठी और दुर्गेश तिवारी की ओर घूमी। करीब 11 महीनों की लंबी तफ्तीश और गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया। मामला तब और भी पेचीदा और संवेदनशील हो गया जब सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें हत्या के बाद दुर्गेश तिवारी अपने घर में मिठाई बांटते नजर आया। जैसे कि किसी बड़ी जीत का जश्न मना रहा हो। यही नहीं, एक वीडियो में एक भाजपा विधायक की हूटर लगी गाड़ी भी आरोपी के घर के बाहर खड़ी दिखी, और दुर्गेश तिवारी उन्हें अगवानी करता हुआ कैमरे में कैद हुआ। यह दृश्य जनता के मन में कई गंभीर सवाल खड़े करता है — क्या न्याय सत्ता की छांव में दब गया था? क्या आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा था? पुलिस अधीक्षक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बयान दिया है कि वायरल वीडियो और तस्वीरों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है और यदि किसी भी स्तर पर राजनीतिक हस्तक्षेप या संरक्षण की पुष्टि होती है, तो उस पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। यह मामला सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है, यह उस सच्चाई की परतें खोल रहा है, जिसमें सत्ता, संरक्षण और साजिश का त्रिकोण नज़र आ रहा है। जनता को अब यह जानने का हक है कि क्या न्याय केवल आम नागरिकों के लिए है, या फिर नेताओं के लिए अलग मापदंड तय हैं?













