
मऊगंज, खनिज माफिया के काले साम्राज्य पर प्रशासन का हंटर आखिरकार चला। मऊगंज के तेजतर्रार कलेक्टर संजय कुमार जैन ने सीधी जिले के एक खनन ठेकेदार पर ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए 10 करोड़ 8 लाख एक हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोका है। यह कार्रवाई उन माफियाओं के लिए करारा संदेश है, जो सरकारी लीज की आड़ में प्राकृतिक संसाधनों की लूट मचाए बैठे हैं। गौरतलब है कि सीधी जिले के ग्राम नेंगुड़ा निवासी कृष्ण कुमार सिंह को मऊगंज क्षेत्र के ग्राम हर्रहा में एक हेक्टेयर क्षेत्र में पत्थर उत्खनन की लीज मिली थी। लेकिन, लीज मिलते ही मानो उन्हें जंगलराज की छूट मिल गई हो। नियमों को ताक पर रखकर खदान में न तो सुरक्षा के लिए फेंसिंग की गई, न ही सूचना बोर्ड लगाए गए। यही नहीं, कृष्ण कुमार सिंह ने लीज के अधिकार क्षेत्र को लांघते हुए कदुआमन बांध के डूब क्षेत्र – जो कि संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्र माना जाता है – में अवैध रूप से उत्खनन किया। यह हरकत सीधे-सीधे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ाने के समान है, एसडीएम और नायब तहसीलदार की संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट में यह साफ़ उजागर हुआ कि खदान के पास लगभग 67 हजार 200 घन मीटर क्षेत्र में अवैध उत्खनन किया गया है। इतने बड़े पैमाने पर की गई यह खुदाई सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व और पर्यावरण दोनों के साथ खुलेआम खिलवाड़ है। कलेक्टर संजय कुमार जैन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भण्डारण) नियम 2022 के तहत कार्रवाई की। जुर्माने की राशि 15 दिन के भीतर जमा नहीं करने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर, कठोर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
प्रशासन की यह सख्ती सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक चेतावनी है – जो भी प्रकृति को नोचने की हिमाकत करेगा, उसे अब माफ नहीं किया जाएगा।
खनन माफिया और उनकी मिलीभगत से आंख मूंद लेने वाले अधिकारियों को भी यह कार्रवाई एक आईना दिखाती है। सवाल यह भी उठता है कि आखिर यह अवैध उत्खनन इतने लंबे समय तक किसकी शह पर चलता रहा?
मऊगंज में जनता अब जवाब मांग रही है।
सरकार की योजना और नियम अगर सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहेंगे और जमीनी स्तर पर उनका मखौल उड़ाया जाएगा – तो फिर ऐसी कार्रवाइयाँ और भी कड़ी होनी चाहिए।













