
मऊगंज। शिक्षा को संस्कार और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है, लेकिन मऊगंज में एक सरकारी शिक्षक की हरकत ने इस गरिमा को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया। वायरल हो रहे एक वीडियो ने सोमवार को तहलका मचा दिया, जिसमें हनुमना जनपद शिक्षा केंद्र के CAC और पहाड़ी शासकीय विद्यालय में पदस्थ शिक्षक जगतनाथ साकेत एक आर्केस्ट्रा कार्यक्रम में डांसर के साथ मंच पर ठुमके लगाते और उस पर नोट उड़ाते नजर आए। इतना ही नहीं, जब आयोजकों ने उन्हें मंच पर चढ़ने से रोका, तो शिक्षक महोदय आपा खो बैठे। न सिर्फ जबरन मंच पर चढ़ने की कोशिश की, बल्कि गाली-गलौज पर भी उतर आए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
मर्यादा तार-तार: शिक्षक बना ‘नचनिया’ का दीवाना
जिस शिक्षक पर बच्चों को भविष्य का निर्माण करने की जिम्मेदारी है, वही जब सरेआम स्टेज पर अशोभनीय हरकतें करता दिखे, तो सवाल तो उठेंगे ही। डांसर के साथ ठुमके लगाना, नोटों की बारिश करना, और मंच पर चढ़ने के लिए हंगामा खड़ा करना—ये क्या किसी शिक्षक के आचरण में शोभा देता है?
वीडियो वायरल, प्रशासन हरकत में, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
मामला जब मीडिया और प्रशासन तक पहुंचा, तो कलेक्टर संजय कुमार जैन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एसडीएम को जांच सौंप दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” वहीं BRC लक्ष्मणधर द्विवेदी के बयान ने आग में घी डालने का काम किया।
BRC का बेहूदा बयान: ‘शिक्षक हैं, क्या एंजॉय न करें?’
बीआरसी द्विवेदी ने शिक्षक की इस हरकत को सामान्य बताते हुए कहा—“अवकाश के दिन चल रहे हैं, एंजॉय न करें क्या? क्या शिक्षक हो जाने से सारी इच्छाएं मर जाती हैं? क्या शिक्षक बच्चा पैदा न करें?”
इस बयान से शिक्षक समुदाय की गरिमा और जिम्मेदारी की सरेआम खिल्ली उड़ाई गई। क्या अब छुट्टी के नाम पर कोई भी शिक्षक सार्वजनिक रूप से अनुशासनहीनता करेगा और जिम्मेदार अफसर उसकी ढाल बन जाएंगे?
कलेक्टर की दो टूक: BRC पर भी होगी कार्रवाई
कलेक्टर संजय कुमार जैन ने यह भी कहा कि अगर BRC ने मर्यादा से बाहर जाकर बयान दिया है, तो उनकी भी भूमिका की जांच होगी और उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सवाल कई हैं, जवाब अब प्रशासन को देने होंगे:
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क्या शिक्षक की ड्यूटी सिर्फ स्कूल तक सीमित है, या समाज में एक आदर्श प्रस्तुत करने की भी है?
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क्या ‘अवकाश’ का अर्थ खुलेआम अश्लीलता और अराजकता है?
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क्या शिक्षा विभाग अपने कर्मियों को जवाबदेह बना पाएगा, या ऐसे मामलों पर पर्दा डाल दिया जाएगा?
मऊगंज का यह मामला केवल एक वीडियो नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है जो शिक्षक की गरिमा को खुद मजाक बना रही है। अब देखना यह होगा कि जांच के नाम पर यह मामला ठंडे बस्ते में जाता है या शिक्षा व्यवस्था में शुचिता की पुनर्स्थापना होती है।













