सीधी: जमीन रिपोर्ट के लिए ₹2000 घूस लेते पटवारी रंगे हाथों गिरफ्तार, लोकायुक्त टीम ने दबोच

 

रीवा मध्य प्रदेश में भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों पर लोकायुक्त का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। रीवा लोकायुक्त टीम ने शनिवार को सीधी जिले की चुरहट तहसील में पदस्थ एक पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।ग्राम टिकर खुर्द में पदस्थ पटवारी शिव प्रताप सिंह पर जमीन संबंधी प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार करने के लिए ₹5,000 की रिश्वत मांगने का आरोप है।

क्या हुआ और कहाँ?

विवरण जानकारी
आरोपी का नाम शिव प्रताप सिंह (पटवारी)
कार्यस्थल ग्राम टिकर खुर्द, चुरहट तहसील, सीधी
रिश्वत की मांग ₹5,000
रंगे हाथों पकड़ी गई राशि ₹2,000 नकद
कार्रवाई करने वाली टीम रीवा लोकायुक्त
महत्व तीन दिनों में लोकायुक्त की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है।

क्यों मांगी जा रही थी रिश्वत?

लोकायुक्त टीआई संदीप भदौरिया ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि शिकायतकर्ता राजेश सिंह ने 4 नवंबर को इस संबंध में लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी।

  1. जमीन विवाद: राजेश सिंह के जमीन विवाद मामले में नायब तहसीलदार चुरहट द्वारा स्टे आदेश जारी किया गया था।
  2. रिपोर्ट की अनिवार्यता: इस आदेश के बाद, पटवारी शिव प्रताप सिंह को शिकायतकर्ता के पक्ष में प्रतिवेदन तैयार करना अनिवार्य था।
  3. रिश्वत की मांग: आरोप है कि पटवारी ने इस सरकारी काम को करने और रिपोर्ट को अनुकूल बनाने के लिए शिकायतकर्ता से ₹5,000 की रिश्वत की मांग की थी।

 लोकायुक्त ने कैसे बिछाया जाल?

शिकायत मिलने के बाद, लोकायुक्त टीम ने पहले आरोपों की पुष्टि की। पुष्टि होने के बाद, पटवारी को पकड़ने के लिए एक ठोस ट्रैप (जाल) तैयार किया गया। शनिवार को निर्धारित समय पर, पटवारी शिव प्रताप सिंह को शिकायतकर्ता राजेश सिंह से ₹2,000 की नकद राशि बतौर रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त टीम ने मौके पर ही दबोच लिया।

 गिरफ्तारी के बाद की कार्रवाई

  • गिरफ्तारी के बाद, लोकायुक्त टीम आरोपी पटवारी को आगे की कानूनी प्रक्रिया और पूछताछ के लिए सीधी सर्किट हाउस ले गई।
  • गहन जांच: सूत्रों के अनुसार, टीम अब पटवारी के मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच करेगी।
  • उद्देश्य: इस जांच का लक्ष्य रिश्वतखोरी की पुष्टि करना और यह सुनिश्चित करना है कि कहीं इस मामले में कोई अन्य सरकारी कर्मचारी भी शामिल तो नहीं है।

यह कार्रवाई मध्य प्रदेश में सरकारी दफ्तरों से भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

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