
मनिकवार। शासन की योजनाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाने और उनकी समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से मनिकवार स्थित सीएफटी भवन में जन विश्वास कार्यक्रम आयोजित किया गया। हालांकि, कार्यक्रम में आम नागरिकों की अपेक्षाकृत कम उपस्थिति और प्राप्त आवेदनों के निराकरण को लेकर सवाल खड़े हुए। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार शिविर में करीब 75 आवेदन प्राप्त हुए। आरोप है कि इनमें से किसी भी आवेदन का मौके पर समाधान नहीं हो सका। इसके चलते अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे कुछ आवेदकों में निराशा देखने को मिली
अधिकारियों-कर्मचारियों की मौजूदगी अधिक होने का दावा
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। इनमें अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, पंचायत विभाग से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं शामिल रहीं। कार्यक्रम को लेकर पहले आमजन के बीच अधिकारियों की मौजूदगी और समस्याओं के समाधान की बात कही गई थी। लेकिन मौके पर अपेक्षित संख्या में ग्रामीणों के नहीं पहुंचने को लेकर भी चर्चा होती रही।
आवेदन लेकर पहुंचे लोग, समाधान नहीं होने से निराशा
शिविर में पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याओं से संबंधित आवेदन अधिकारियों को सौंपे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे कार्यक्रमों में प्राप्त आवेदनों का मौके पर या निर्धारित समय में प्रभावी समाधान नहीं होता है, तो इन आयोजनों की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि शिविर में पहले से सामने आने वाली समस्याओं से जुड़े आवेदन ही दोहराए गए, जिनका समाधान तत्काल नहीं हो सका। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जन विश्वास कार्यक्रम के उद्देश्य पर उठी बहस
कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद आम नागरिकों की कम भागीदारी ने ‘जन विश्वास’ कार्यक्रम के उद्देश्य पर चर्चा छेड़ दी है। सवाल यह भी है कि भविष्य में ऐसे शिविरों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा और प्राप्त शिकायतों के निराकरण की निगरानी किस तरह की जाएगी। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि केवल आवेदन लेने तक सीमित रहने के बजाय प्रत्येक शिकायत की सुनवाई और उसके समाधान की स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि ग्रामीणों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हो सके।
रिपोर्ट: अनिल गुप्ता













