सिस्टम की बेरहमी: सीधी में सुरक्षाकर्मियों ने रोका, तो फफक-फफक कर रोई बैगा समाज की बेटी; मुख्यमंत्री से ‘डॉक्टर’ बनने की भीख मांगती रही अनामिका!

लाडली लक्ष्मी और सुशासन के दावों पर ‘आंसुओं’ का तमाचा: दो बार कलेक्टर और विधायक से लगाई गुहार, नहीं हुई सुनवाई; अब CM से मिलने आई बेटी को मिली दुत्कार!

सीधी| मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सीधी दौरे के दौरान आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सरकार के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के नारों की हकीकत बयां कर दी। धौहनी विधानसभा के डेबा निवासी बैगा समाज की बेटी **अनामिका बैगा** अपने डॉक्टर बनने के सपने को बचाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलना चाहती थी, लेकिन सुरक्षाकर्मियों के कड़े घेरे और प्रशासनिक बेरुखी ने उसे बीच रास्ते में ही रोक दिया।

अनामिका बैगा की आँखों में डॉक्टर बनने का सपना है, लेकिन पिता की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वे मेडिकल की पढ़ाई का बोझ नहीं उठा सकते। अनामिका का कहना है कि वह मुख्यमंत्री को अपनी गरीबी और पढ़ाई के खर्च के बारे में बताना चाहती थी। उसने मीडिया के सामने रोते हुए कहा, “मैं डॉक्टर बनना चाहती हूँ, लेकिन फीस के लिए पैसे नहीं हैं। सरकार कहती है हम बेटियों के हितैषी हैं, तो फिर मेरी मदद क्यों नहीं हो रही?”

सबसे शर्मनाक बात यह है कि अनामिका ने बताया कि वह इस मदद के लिए **दो बार कलेक्टर** से मिल चुकी है और अपने क्षेत्रीय विधायक **कुंवर सिंह टेकाम** के पास भी गुहार लगा चुकी है। बावजूद इसके, आज तक उसे केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं। आज अंतिम उम्मीद लेकर वह बहरी पहुंची थी, लेकिन वहां भी सुरक्षाकर्मियों ने उसे मुख्यमंत्री तक नहीं पहुँचने दिया।

अनामिका काफी देर तक सुरक्षा घेरे के बाहर खड़ी होकर मुख्यमंत्री से मिलने की मिन्नतें करती रही और फफक-फफक कर रोती रही। लेकिन वीआईपी प्रोटोकॉल के आगे एक मासूम के आँसू बेअसर रहे। मुख्यमंत्री का काफिला निकल गया और अनामिका का सपना एक बार फिर सिसकियों में दब गया।

कलेक्टर सीधी और विधायक कुंवर सिंह टेकाम जी, क्या एक आदिवासी बेटी का डॉक्टर बनने का सपना देखना गुनाह है? जब मुख्यमंत्री 213 करोड़ के निर्माण कार्यों की सौगात दे रहे थे, क्या उस बजट में इस बेटी की पढ़ाई के लिए कोई जगह नहीं थी? मुख्यमंत्री जी, आपकी सुरक्षा ऐसी भी क्या कि एक लाचार बेटी की आवाज़ आप तक न पहुँच सके?

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