कल्पना मिश्रा को न्याय दिलाने के आंदोलन में पहुंचे कांग्रेस नेता, मौन व्रत रखकर जताया विरोध

रीवा। कल्पना मिश्रा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सिरमौर चौक पर चल रहे आमरण अनशन को शनिवार को कांग्रेस नेताओं का समर्थन मिला। आंदोलन के चौथे दिन कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा और पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना धरना स्थल पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने आंदोलनकारियों के साथ बैठकर मौन व्रत रखा और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग का समर्थन किया।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं के पहुंचने के बाद आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा भी तेज हो गई।

दोषी डॉक्टरों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग

आंदोलन कर रहे लोगों की प्रमुख मांग है कि कल्पना मिश्रा की मौत के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे डॉक्टरों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही संबंधित डॉक्टरों का मेडिकल लाइसेंस निरस्त करने और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि केवल जांच और निलंबन से न्याय नहीं मिलेगा। उनका दावा है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होना जरूरी है।

इलाज में लापरवाही के आरोपों के बाद जारी है विरोध

कल्पना मिश्रा की मौत के बाद उनके परिजन और सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की जान चली गई।

हालांकि, इन आरोपों से जुड़े तथ्यों की जांच फिलहाल संबंधित स्तर पर जारी है। डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है।

डॉक्टर निलंबित, कई स्तरों पर जांच जारी

मामले में संबंधित डॉक्टर को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। घटनाक्रम की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई थी, जिसमें बाद में बदलाव भी किया गया। जांच टीम द्वारा मामले से संबंधित दस्तावेज, सैंपल और अन्य आवश्यक जानकारी जुटाई गई है।

इसके अलावा शासन स्तर से भी जांच कराई जा रही है। मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की जिम्मेदारी और लापरवाही से जुड़े तथ्यों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

परिजन बोले- जांच के साथ हो आपराधिक कार्रवाई

मृतका के परिजनों का कहना है कि डॉक्टर का निलंबन और जांच की प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग है कि यदि जांच में लापरवाही या आपराधिक जिम्मेदारी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

शनिवार को विधायक अभय मिश्रा और पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ने आंदोलन स्थल पर मौन व्रत रखकर पीड़ित परिवार की मांगों का समर्थन किया। नेताओं ने मामले में जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें न्याय की दिशा में ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय है। धरना स्थल से संदेश दिया गया—“जब तक न्याय नहीं, तब तक विश्राम नहीं।”

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