ग्राम पंचायत बेलाही खुर्द का मामला: ग्रामीणों ने गौवंश की सुरक्षा और गौशालाओं की व्यवस्था को लेकर जताई चिंता, मामला सामने आने के बाद जनपद CEO परमानंद तिवारी ने टीम भेजने का भरोसा दिया

मऊगंज। जिले में सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गौवंश की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जनपद पंचायत मऊगंज की ग्राम पंचायत बेलाही खुर्द के ग्राम तमरी में सड़क हादसे के बाद गौवंश की स्थिति सामने आने पर ग्रामीणों में चिंता और नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद घायल पशु के उपचार और सुरक्षित व्यवस्था के लिए तत्काल सहायता मिलनी चाहिए थी। मऊगंज में निराश्रित गौवंश को सड़कों से हटाकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से अभियान चलाए जाने की खबरें पहले भी सामने आई हैं। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में सड़क पर घूमते मवेशियों की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
तमरी की घटना ने फिर खड़े किए सवाल
ग्रामीणों के अनुसार, तमरी में सड़क हादसे के बाद गौवंश की हालत देखकर लोग परेशान हो गए। उनका कहना है कि यदि समय रहते उपचार और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था हो तो ऐसे हादसों में पशुओं की जान बचाई जा सकती है। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर पंचायत और संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। ग्रामीणों की मांग है कि घायल गौवंश के उपचार के साथ-साथ सड़क पर घूमने वाले मवेशियों के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
गौशालाओं की व्यवस्था पर भी निगरानी की जरूरत
तमरी की घटना के बीच मऊगंज जिले की गौशालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी मीडिया रिपोर्टों में सवाल उठ चुके हैं। जुलाई 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में कुछ गौशालाओं में दर्ज गोवंश और मौके पर मौजूद गोवंश की संख्या में अंतर के आरोप लगाए गए थे। इन रिपोर्टों में जांच और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का भी उल्लेख था। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच से ही स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में तमरी की घटना के साथ गौशालाओं की जमीनी व्यवस्था की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
प्रशासन के सामने मामला पहुंचा
घटना की जानकारी मिलने के बाद इंडिया हेडलाइन 24 के मुख्य संपादक दीपक कुमार गुप्ता ने जनपद पंचायत मऊगंज के CEO परमानंद तिवारी से संपर्क कर घायल गौवंश के उपचार और तत्काल राहत व्यवस्था की मांग रखी। बातचीत के दौरान CEO परमानंद तिवारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पंचायत और पशु चिकित्सा अमले को मौके पर भेजने का भरोसा दिया। साथ ही, यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही गई।
30 सितंबर के कांग्रेस प्रदर्शन में भी उठा था गौवंश का मुद्दा
मऊगंज में 30 सितंबर को पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना के नेतृत्व में कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव हुआ था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन के दौरान क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने कई मुद्दे उठाए गए। आपके दिए ज्ञापन के अनुसार, उसमें गौशालाओं और सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशियों की समस्या का भी उल्लेख किया गया था। इस मुद्दे पर प्रशासन से प्रभावी व्यवस्था की मांग की गई थी।
अब कार्रवाई और स्थायी व्यवस्था पर नजर
तमरी की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि घायल गौवंश के उपचार के साथ-साथ सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा। ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत, पशु चिकित्सा विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी संयुक्त रूप से अभियान चलाकर निराश्रित गौवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं और गौशालाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें।













