तीन किलोमीटर पदयात्रा के बाद कलेक्ट्रेट का घेराव, बैरिकेडिंग के बीच जमकर नारेबाजी; कलेक्टर-एसपी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना, शाम को अधिकारियों ने पहुंचकर लिया ज्ञापन

मऊगंज। ‘वोट चोरी’ के आरोपों, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग और मऊगंज जिले की स्थानीय समस्याओं को लेकर बुधवार को कांग्रेस ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक एवं कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुखेंद्र सिंह बन्ना के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक करीब तीन किलोमीटर की पदयात्रा निकाली। इसके बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव और धरना दिया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ स्वास्थ्य, बिजली, आवारा मवेशी, गौशालाओं, शराब के कथित अवैध कारोबार, राजस्व एवं अन्य विभागों में भ्रष्टाचार जैसे स्थानीय मुद्दे भी उठाए। हालांकि प्रदर्शन का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा कांग्रेस द्वारा उठाया गया ‘वोट चोरी’ का आरोप रहा। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की जांच की मांग रखी।
तीन किलोमीटर की पदयात्रा के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचे कांग्रेसी
जिला कांग्रेस कार्यालय से शुरू हुई पदयात्रा में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां पहले से पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने का प्रयास किया। इस दौरान दो बैरिकेड टूटने के बाद प्रदर्शनकारी तीसरे बैरिकेड तक पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गएIप्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और पुलिस-प्रशासन के बीच काफी देर तक बातचीत होती रही।

बन्ना की मांग—कलेक्टर और एसपी खुद आएं
कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ने यह कहते हुए अपर कलेक्टर से तत्काल ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया कि जिन मुद्दों को लेकर कांग्रेस सड़क पर उतरी है, उनका जवाब जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को स्वयं आकर सुनना चाहिए। बन्ना कलेक्टर संजय कुमार जैन और पुलिस अधीक्षक श्री सुरेन्द्र कुमार जैन को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद शाम को कलेक्टर और एसपी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचेI इसके बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच सीधे संवाद का रास्ता बना और कांग्रेस द्वारा उठाए गए स्थानीय मुद्दों को अधिकारियों के सामने रखा गया।
ज्ञापन में 10 स्थानीय मुद्दे, प्रशासन के सामने रखी गईं मांगें
कांग्रेस जिला कमेटी की ओर से कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में मऊगंज जिले की कई समस्याओं का उल्लेख किया गया है। ज्ञापन में मऊगंज सिविल अस्पताल में चिकित्सकों की समय पर उपलब्धता का मुद्दा उठाया गया है। कांग्रेस का दावा है कि मरीजों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर नहीं मिल पा रही हैं। पार्टी ने अस्पताल की व्यवस्था की समीक्षा कर आम नागरिकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।दूसरे मुद्दे में जिले की गौशालाओं की व्यवस्थाओं और सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशियों का मामला उठाया गया है। ज्ञापन में सड़क दुर्घटनाओं में मवेशियों की मौत और उनके शवों के लंबे समय तक सड़कों पर पड़े रहने का दावा करते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है।

मलकपुर में हाथी की मौत का मुद्दा भी उठा
कांग्रेस ने मऊगंज जिले के मलकपुर में हाथी की मौत, का मुद्दा भी ज्ञापन में शामिल किया है। ज्ञापन में वन विभाग की कथित लापरवाही को जिम्मेदार बताते हुए संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई हैयह मांग उस घटना की ओर इशारा करती है जिसमें मलकपुर क्षेत्र में बिजली करंट की चपेट में आने से हथिनी की मौत हुई थी। इस मामले में कांग्रेस ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
सरकारी जमीन और विस्थापन से जुड़े मुद्दे भी ज्ञापन में
ज्ञापन में मऊगंज के नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमियों पर बसे अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवारों के आवास और उचित व्यवस्थापन का मुद्दा उठाया गया है।वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय एवं निजी जमीनों पर लंबे समय से बसे अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को लेकर भी मांग रखी गई है कि यदि उन्हें हटाने की स्थिति बनती है तो पहले उचित व्यवस्थापन किया जाए और उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाए।

शराब और बिजली व्यवस्था पर भी कांग्रेस ने घेरा
कांग्रेस ने जिले में कथित अवैध शराब बिक्री और शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अवैध पैकारी के माध्यम से शराब का कारोबार किया जा रहा है और निर्दोष लोगों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए जा रहे हैं।इसके अलावा बिजली व्यवस्था को लेकर भी शिकायत रखी गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लोगों को अनियमित बिजली आपूर्ति के साथ अधिक राशि के बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। मामले की जांच कर सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
पत्रकार पर दर्ज मामले की निष्पक्ष जांच की मांग
ज्ञापन में मऊगंज में हाल ही में एक पत्रकार के खिलाफ दर्ज किए गए कथित मुकदमे का उल्लेख करते हुए उसकी निष्पक्ष विवेचना की मांग भी की गई है। कांग्रेस ने कहा कि पत्रकार के खिलाफ दर्ज मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यदि कोई तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर उचित कार्रवाई हो सके।

सफाई, बिजली और विभागीय भ्रष्टाचार का मुद्दा
कांग्रेस ने नगरीय क्षेत्रों में आने वाले त्योहारों को देखते हुए साफ-सफाई और विद्युत आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त रखने की मांग की।ज्ञापन के अंतिम बिंदुओं में पुलिस, राजस्व सहित विभिन्न सरकारी विभागों में आम जनता को कथित तौर पर हो रही परेशानियों और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की कि आम नागरिकों की शिकायतों का समाधान किया जाए और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर जांच कर कार्रवाई की जाए।
दूसरे ज्ञापन में CEC के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम भी अलग ज्ञापन सौंपा। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं तो उन्हें पद से हटाया जाए। ज्ञापन में कांग्रेस ने मतदाता सूची से संबंधित अपने आरोपों को दोहराते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को उठाया। इसके अलावा मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों में प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव तत्काल कराने की मांग भी ज्ञापन में दर्ज है।यह मांग ऐसे समय में उठाई गई है जब कांग्रेस देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर ‘वोट चोरी’ के आरोपों के साथ प्रदर्शन कर रही है। विभिन्न राज्यों में कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा मतदाता सूची की समीक्षा जैसी मांगें उठाई हैं।

अब प्रशासन के जवाब पर नजर
मऊगंज में हुए इस प्रदर्शन का घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि कांग्रेस पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंची और उन्होंने अपर कलेक्टर को ज्ञापन देने के बजाय कलेक्टर और एसपी को स्वयं मौके पर बुलाने की मांग की।शाम को दोनों अधिकारियों के पहुंचने के बाद ज्ञापन सौंपा गया। अब कांग्रेस द्वारा उठाए गए स्थानीय मुद्दों पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई होती है, यह आगे देखने वाली बात होगी। कांग्रेस द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’, विभागीय भ्रष्टाचार, शराब कारोबार, स्वास्थ्य व्यवस्था और वन विभाग की लापरवाही संबंधी आरोप पार्टी के दावे हैं। संबंधित प्रशासनिक विभागों और निर्वाचन अधिकारियों का पक्ष इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।













