Sidhi:-11वें दिन भी जारी रहा लीला साहू का अनशन, बोलीं—आश्वासन नहीं, अब सड़क चाहिए

सीधी। खड्डी खुर्द से बगैहा टोला तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर लीला साहू और ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन 24 सितंबर को 11वें दिन भी जारी रहा। 14 सितंबर से शुरू हुए इस आंदोलन में अब ग्रामीणों की मांग एक ही बिंदु पर टिक गई है—सड़क का अधूरा काम पूरा हो और आवागमन के लिए स्थायी रास्ता जमीन पर तैयार हो। सड़क की बदहाली को लेकर लंबे समय से आवाज उठा रहीं लीला साहू का कहना है कि ग्रामीणों को वर्षों से आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन अब वे केवल आश्वासन पर आंदोलन समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं। धरना स्थल पर उनका कहना है कि जब तक सड़क निर्माण की ठोस प्रक्रिया जमीन पर दिखाई नहीं देती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

11 दिन से टेंट के नीचे बैठी लीला साहू, ग्रामीण भी साथ

14 सितंबर को लीला साहू ने ग्रामीणों के साथ सड़क की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। आंदोलन के दौरान ग्रामीण भी उनके साथ धरना स्थल पर मौजूद रहे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन की ओर से धरना स्थल पर पुलिस की मौजूदगी भी रही है। ग्यारहवें दिन तक पहुंच चुके आंदोलन ने सड़क के मुद्दे को एक बार फिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने ला खड़ा किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्कूल, अस्पताल, बाजार और रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम है।

करीब 10.50 किलोमीटर सड़क, अधूरा हिस्सा बना मुख्य मुद्दा

विवादित मार्ग को अलग-अलग रिपोर्टों में करीब 10 से 10.50 किलोमीटर लंबा बताया गया है। खड्डी खुर्द-बगैहा टोला से गजरी को जोड़ने वाले इस मार्ग का एक हिस्सा पहले से निर्माणाधीन/निर्मित बताया जाता है, जबकि शेष हिस्से को लेकर ग्रामीण लगातार मांग कर रहे हैं। खड्डी खुर्द से बगैहा टोला तक करीब 5 किलोमीटर हिस्सा कच्चा बताया गया है। इसी अधूरे हिस्से को लेकर आंदोलन तेज हुआ है। ग्रामीणों की मांग है कि सड़क का शेष हिस्सा भी बनाया जाए, ताकि पूरे मार्ग से सालभर सुगम आवागमन हो सके।

बारिश में सड़क की हालत ने बढ़ाई परेशानी

 बरसात के दौरान कच्चे और खराब मार्ग की स्थिति ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। कीचड़ और खराब रास्ते के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं।15 सितंबर की एक रिपोर्ट में इसी सड़क की बदहाली के कारण एंबुलेंस के गांव तक नहीं पहुंच पाने और एक महिला के घर पर प्रसव होने की घटना का उल्लेख किया गया था। यह मामला सामने आने के बाद सड़क की समस्या को लेकर बहस और तेज हुई।यही वजह है कि आंदोलनकारी सड़क को केवल विकास कार्य नहीं बल्कि स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा मुद्दा भी बता रहे हैं।

दो साल से उठ रही सड़क की मांग

लीला साहू पिछले कई वर्षों से इस सड़क को लेकर आवाज उठाती रही हैं। वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सड़क बनवाने की अपील वाला उनका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हुआ था। इसके बाद भी वह लगातार सड़क निर्माण की मांग उठाती रही हैं।2025 में सड़क निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति से संबंधित रिपोर्टें भी सामने आई थीं। एक रिपोर्ट में 10.50 किलोमीटर सड़क के लिए ₹448.63 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति का उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद वर्तमान आंदोलन यह सवाल उठा रहा है कि स्वीकृति अथवा योजना के बाद जमीन पर पूरा निर्माण कब तक होगा।

पहले भी मिले आश्वासन, अब जमीन पर काम की मांग

आंदोलनकारियों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर पहले भी आश्वासन मिलते रहे हैं। इसी कारण इस बार उनका जोर केवल घोषणा या आश्वासन पर नहीं, बल्कि वास्तविक निर्माण शुरू होने पर है। सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में सीधी कलेक्टर की ओर से बताया गया था कि खड्डी खुर्द से बगैहा मार्ग के 5.07 किलोमीटर हिस्से को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है और केंद्र से राशि आवंटित होने के बाद निर्माण कराने की बात कही गई थी। अब आंदोलनकारी जानना चाहते हैं कि इस प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति क्या है और सड़क का काम जमीन पर कब शुरू होगा।

राजनीतिक समर्थन भी पहुंचा आंदोलन तक

 सड़क का मुद्दा अब केवल स्थानीय ग्रामीणों तक सीमित नहीं रहा। आंदोलन के दौरान राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। 17 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा सड़क के मुद्दे पर सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सवाल किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। वहीं 20 सितंबर को लीला साहू द्वारा चुरहट विधायक अजय सिंह राहुल को धरना स्थल पर आने का न्योता दिए जाने की खबर भी सामने आई। हालांकि आंदोलन का मूल मुद्दा अभी भी वही है—सड़क का अधूरा हिस्सा पूरा कराना।

11वें दिन सबसे बड़ा सवाल—अब आगे क्या?

ग्यारह दिन से चल रहे आंदोलन के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन आंदोलनकारियों से बातचीत के साथ सड़क निर्माण की स्पष्ट समयसीमा कब सामने रखेगा। ग्रामीणों की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि वे सड़क का काम शुरू होने तक आंदोलन जारी रखना चाहते हैं। वहीं प्रशासन की ओर से सड़क की स्वीकृति, बजट और निर्माण प्रक्रिया को लेकर जो भी आधिकारिक स्थिति है, उसे सार्वजनिक किए जाने से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल खड्डी खुर्द-बगैहा टोला की सड़क पर बैठा यह आंदोलन एक ऐसे सवाल को सामने ला रहा है, जिसका जवाब ग्रामीण जमीन पर बनने वाली सड़क में तलाश रहे हैं—आखिर वर्षों की मांग के बाद पक्की सड़क कब मिलेगी?

लीला साहू के आंदोलन का संदेश

11वें दिन तक पहुंच चुके इस आंदोलन का संदेश साफ है—ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निर्माण कार्य की शुरुआत देखना चाहते हैं। सड़क निर्माण शुरू होने और पूरा होने की प्रक्रिया ही तय करेगी कि वर्षों से चली आ रही यह मांग कब स्थायी समाधान तक पहुंचती है।

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