Rewa:- कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत मामले में बड़ी कार्रवाई, डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त; 15 दिन से अनशन कर रहे पिता को हटाया गया

FIR की मांग पर अड़े परिवार का आंदोलन जारी रहा, स्वास्थ्य बिगड़ने पर प्रशासन ने रामशिरोमणि मिश्रा को अस्पताल पहुंचाया

रीवा। संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में 16 सितंबर को दो अहम घटनाक्रम सामने आए। एक ओर श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय ने डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया, वहीं दूसरी ओर बेटी और नवजात को न्याय दिलाने की मांग को लेकर 15 दिनों से आमरण अनशन कर रहे कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा को प्रशासन ने धरनास्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया।

मामले में परिवार लगातार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR और निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन का कहना है कि लगातार अनशन के कारण रामशिरोमणि मिश्रा की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ रही थी और उनका जीवन प्राथमिकता होने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

15 दिन से सिरमौर चौराहे पर चल रहा था अनशन

कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा बेटी और नवजात की मौत के मामले में आपराधिक कार्रवाई की मांग को लेकर सिरमौर चौराहे पर अनशन कर रहे थे। लगातार अन्न त्यागने के कारण उनकी तबीयत खराब होने की खबरें भी सामने आती रहीं।

16 सितंबर को पुलिस और प्रशासन की टीम धरनास्थल पहुंची और उन्हें वहां से हटाकर अस्पताल ले गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनने की भी रिपोर्ट सामने आई है। रामशिरोमणि मिश्रा को बाद में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

तहसीलदार शिव शंकर शुक्ला के अनुसार, धरना जिस स्थान पर चल रहा था वह व्यस्त सड़क क्षेत्र है और वहां लंबे समय तक प्रदर्शन से यातायात प्रभावित हो रहा था। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि अनशन के कारण पिता की सेहत लगातार खराब हो रही थी।

डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त

इसी बीच श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय की ओर से डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई एक पुराने विभागीय मामले से जुड़ी है, जिसमें सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी नर्सिंग होम भेजने के आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, विभागीय जांच में डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ दीर्घशास्ति की अनुशंसा की गई थी और बाद में उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। अब चिकित्सा महाविद्यालय की ओर से उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्ति का प्रशासनिक आदेश एक पुराने विभागीय मामले से संबंधित बताया गया है। इसे कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में सीधे तौर पर अंतिम दोषसिद्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

कल्पना और नवजात की मौत के बाद हुईं कई कार्रवाइयां

26 अगस्त 2026 की रात संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत हुई थी। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में कथित लापरवाही के आरोप लगाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग शुरू की।

इसके बाद अस्पताल के दो नर्सिंग स्टाफ और ड्यूटी से जुड़े चिकित्सकों पर निलंबन की कार्रवाई की गई। तत्कालीन अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाया गया। 7 सितंबर को मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल का रीवा से सतना मेडिकल कॉलेज तबादला किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।

मामले की जांच के लिए प्रशासनिक स्तर पर जांच प्रक्रिया भी शुरू की गई है। परिवार हालांकि इन विभागीय कार्रवाइयों को पर्याप्त नहीं मान रहा और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ FIR की मांग पर कायम है।

वायरल वीडियो के बाद मामला चर्चा में आया

घटना के बाद कल्पना मिश्रा का अस्पताल से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह कथित तौर पर अपनी परेशानी और डर व्यक्त करती दिखाई दे रही थी। वीडियो सामने आने के बाद मामला व्यापक चर्चा में आया और परिजनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही के आरोपों को लेकर कार्रवाई की मांग तेज कर दी।

हालांकि, किसी वीडियो में कही गई बात अपने आप में चिकित्सकीय लापरवाही या किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम प्रमाण नहीं होती। इसके लिए जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड का परीक्षण आवश्यक है।

परिवार की मांग—FIR और निष्पक्ष जांच

परिवार का कहना है कि विभागीय निलंबन और प्रशासनिक तबादले पर्याप्त नहीं हैं। उनकी मुख्य मांग है कि मौत के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी के खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी बनती है तो FIR दर्ज की जाए।

दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि जांच के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 4 सितंबर को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के अनशन स्थल पहुंचने और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।

अब मामले में सबसे अहम सवाल जांच के निष्कर्ष और उसके आधार पर होने वाली आगे की कार्रवाई का है। साथ ही, 15 दिन के अनशन के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए रामशिरोमणि मिश्रा की मांगों और परिवार की FIR संबंधी अपील पर प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

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