स्कूलों में समय पर किताबें नहीं पहुंचने का दावा, ‘जादुई पिटारा’ को लेकर भी शिक्षकों पर दबाव के आरोप; शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर उठे सवाल

रीवा। अनिल गुप्ता। रायपुर कर्चुलियान जनपद शिक्षा केंद्र में पदस्थ बीआरसी की कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षकों और स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि विकासखंड के कई स्कूलों में विद्यार्थियों तक पाठ्य-पुस्तकें समय पर नहीं पहुंच सकीं, जबकि शिक्षकों से पुस्तकों की प्राप्ति संबंधी प्रमाण पहले ही लिए जाने की बात सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि अब संबंधित ठेकेदार की ओर से अधूरी किताबें स्कूलों तक भेजी जा रही हैं। इससे शिक्षकों में असंतोष होने की बात कही जा रही है। हालांकि, कितने स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचीं और पुस्तकों की आपूर्ति से संबंधित वास्तविक स्थिति क्या है, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने आना बाकी है।
‘जादुई पिटारा’ के वितरण को लेकर भी सवाल
प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शासन द्वारा स्कूलों के लिए ‘जादुई पिटारा’ उपलब्ध कराया गया है। इसके वितरण की जिम्मेदारी बीआरसी स्तर पर होने और परिवहन के लिए राशि आवंटित किए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि शिक्षकों को स्कूल तक सामग्री पहुंचाने के बजाय बीआरसी भवन रायपुर कर्चुलियान से ही सामग्री ले जाने के लिए मौखिक रूप से कहा गया। इसके बाद शिक्षकों द्वारा वहां से सामग्री ले जाने की बात सामने आई है। यदि परिवहन के लिए वास्तव में राशि आवंटित हुई है, तो उसका उपयोग किस प्रकार किया गया और सामग्री विद्यालयों तक किस व्यवस्था के तहत पहुंचाई गई, यह रिकॉर्ड से स्पष्ट हो सकता है।
स्कूल विजिट और TA/DA को लेकर भी उठे सवाल
बीआरसी कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर स्कूल विजिट से जुड़े TA/DA भुगतान पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि हर महीने विभिन्न स्कूलों के निरीक्षण का उल्लेख कर यात्रा भत्ता आदि का भुगतान लिया जा रहा है। ऐसे में स्कूल विजिट की तारीख, निरीक्षण रिपोर्ट, यात्रा विवरण और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
शौचालय निर्माण में कथित अनियमितता का आरोप
स्थानीय सूत्रों के हवाले से शौचालय निर्माण से जुड़े मामलों में भी कथित अनियमितता और वसूली के आरोप लगाए गए हैं। दावा है कि निर्माण कार्यों को पूर्ण दर्शाने संबंधी प्रमाण-पत्रों और बिल भुगतान की प्रक्रिया में एक मध्यस्थ की भूमिका रहती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि इस संबंध में शिकायत या दस्तावेज उपलब्ध हैं तो उनकी जांच के आधार पर ही किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
बच्चों की पढ़ाई पर सबसे बड़ा सवाल
पूरे मामले में सबसे गंभीर चिंता विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति को लेकर सामने आ रही है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय मनिकवार में कक्षा 6-7 के विद्यार्थियों से पाठ पढ़वाने के दौरान उनकी बुनियादी पढ़ने की क्षमता को लेकर चिंता सामने आई। यदि विकासखंड के स्कूलों में वास्तव में ऐसी स्थिति है तो यह केवल किसी एक अधिकारी या स्कूल का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता का महत्वपूर्ण मुद्दा है।शिक्षकों से अपने शैक्षणिक दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने की अपेक्षा है, लेकिन साथ ही विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बनती है कि वे नियमित निरीक्षण कर शिक्षा की गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति सामने लाएं।
कलेक्टर से जांच की मांग
रायपुर कर्चुलियान की शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मांग की जा रही है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की दस्तावेजी और भौतिक जांच कराए।किताबों की आपूर्ति, प्राप्ति प्रमाण-पत्र, ‘जादुई पिटारा’ के परिवहन, स्कूल विजिट, TA/DA भुगतान तथा निर्माण कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होने पर आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है।यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं बीआरसी और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है।
शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन सवालों का जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि रिकॉर्ड और मौके की जांच से सामने आएगा।
रिपोर्ट: अनिल गुप्ता
इंडिया हेडलाइन 24













