थाने से लेकर अफसरों की चौखट तक पहुंची शिकायत, अब मीडिया के सामने महिला ने सुनाई अपनी पीड़ा; सवाल—FIR के बाद भी आखिर कार्रवाई का इंतजार क्यों?

मऊगंज। सरकारी फाइलों में शिकायत दर्ज हो जाए, FIR भी कायम हो जाए और पीड़ित परिवार फिर भी खुद को असुरक्षित महसूस करे, तो सवाल सिर्फ एक मामले का नहीं रहता—सवाल पूरी व्यवस्था की कार्यशैली पर उठता है। मऊगंज में सामने आया एक मामला कुछ ऐसा ही सवाल खड़ा कर रहा है। शिकायतकर्ता अर्चना साकेत द्वारा दिए गए दस्तावेजों के मुताबिक, 4 जनवरी 2026 की रात उनके साथ कथित गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी की घटना हुई। इसके बाद पुलिस में शिकायत की गई और दस्तावेजों के अनुसार थाना मऊगंज में FIR क्रमांक 0008/2026 दर्ज की गई।
FIR हो गई… लेकिन भय का ‘अंतिम संस्कार’ कब होगा?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद भी घर जाकर तथा फोन के माध्यम से जान से मारने की धमकियां दिए जाने का सिलसिला जारी रहा। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी और दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। अब यहां व्यवस्था से एक सीधा सवाल बनता है—अगर शिकायत गंभीर थी और FIR भी दर्ज हो गई, तो पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय का भरोसा जमीन पर कितना मिला? क्योंकि कागज पर FIR की स्याही सूख जाने भर से किसी पीड़ित का डर खत्म नहीं होता।
वीडियो में कैमरों के सामने अपनी बात रखती महिला
भेजे गए वीडियो में शिकायतकर्ता महिला कई मीडिया माइक्रोफोनों के सामने अपनी बात रखती दिखाई दे रही हैं। उनके हाथ में दस्तावेज भी नजर आते हैं और वह पूरे मामले को लेकर अपनी बात पत्रकारों के सामने रखती हैं। यानी मामला अब सिर्फ किसी बंद कमरे की शिकायत तक सीमित नहीं है। दस्तावेज थाने की फाइल तक पहुंचे और मामला कैमरों के सामने भी आ गया। अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित पुलिस और प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है
दस्तावेजों में SC/ST Act की धाराएं भी दर्ज
उपलब्ध FIR की प्रति में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी दर्ज दिखाई देती हैं। FIR में घटना की तारीख 04 जनवरी 2026 तथा FIR दर्ज होने की तारीख 06 जनवरी 2026 अंकित है। शिकायत में पीड़िता ने स्वयं को अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित बताया है और आरोप लगाया है कि घटना के दौरान जातिसूचक एवं अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
शिकायतों का सिलसिला भी दस्तावेजों में दर्ज
मामले में पुलिस अधीक्षक मऊगंज और पुलिस महानिरीक्षक रीवा जोन को दिए गए शिकायत आवेदनों का भी उल्लेख दस्तावेजों में मिलता है। शिकायतकर्ता ने आरोपी की गिरफ्तारी तथा परिवार की सुरक्षा के लिए कार्रवाई की मांग की है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या FIR दर्ज होने के बाद जांच और सुरक्षा की कार्रवाई उतनी ही तेजी से हुई, जितनी तेजी से शिकायतकर्ता को अपनी आवाज लेकर अलग-अलग अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने पड़े?
अब प्रशासन के सामने असली परीक्षा
मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगी। लेकिन दस्तावेजों में दर्ज शिकायत, FIR और अब सामने आए वीडियो के बाद प्रशासन के सामने स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी जरूर बढ़ गई है।जरूरत इस बात की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, शिकायतकर्ता और उसके परिवार की सुरक्षा संबंधी दावे की जांच की जाए तथा यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
क्योंकि सवाल सिर्फ FIR दर्ज होने का नहीं है… सवाल यह है कि FIR के बाद पीड़ित को न्याय का भरोसा जमीन पर कब दिखाई देगा?













